बिलासपुर यूनिवर्सिटी पेपर लीक कांड के बाद दो दिनों से पुलिस वाट्स एप के आधार पर छात्रों की धरपकड़ कर रही है। इससे दहशत में आए छात्र-छात्राओं ने रातोंरात एप को अनइंस्टाल कर दिया है। अधिकांश ने तो मोबाइल ही बंद कर दिया है।
बिलासपुर यूनिवर्सिटी के पांच जिलों के 164 कॉलेजों में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं अब वाट्स एप का यूज नहीं करना चाहते। उनको चिंता है कि अगर किसी दोस्त ने गलती से भी कोई प्रश्नपत्र या गेसिंग पेपर भेज दिया तो उन्हें पुलिस पकड़ लेगी। इसी तरह अखबार में नाम प्रकाशित होने से भी छात्र खौफ में हैं। अभी एक दर्जन परीक्षार्थी तारबाहर थाने का चक्कर काट रहे हैं। सीएमडी, डीपी विप्र, केआर लॉ और जेपी वर्मा कॉलेज के लगभग पचास से अधिक परीक्षार्थियों ने बताया कि वह परीक्षा तक मोबाइल का उपयोग नहीं करेंगे। सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने वाले भी अब अपना पोस्ट हटा रहे हैं।
जांच टीम को कुछ नहीं मिला
बिलासपुर यूनिवर्सिटी की आठ टीमों को जांच पड़ताल में शुक्रवार को भी कुछ नहीं मिला। हालांकि देर शाम तक इस बात की सुगबुगाहट तेज रही कि जांजगीर व कोरबा जिले में कोई महत्वपूर्ण सुराग मिला है। हालांकि कुलसचिव ने इससे इनकार किया है।
जांच टीमें अपना काम कर रही हैं। अब तक गड़बड़ी का पता नहीं चला है। उम्मीद है कि 21 मार्च तक पेपर लीक करने वाले पकड़ लिए जाएंगे।
डॉ.अरुण सिंह
कुलसचिव, बिलासपुर यूनिवर्सिटी
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